बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की लहर
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बिहार में राजद की लहर

 

– वन्दना यादव, पटना

राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गाधी उर्फ महात्मा गाधी की कर्मभूमि बिहार के पश्चिम चम्पारण से पूर्व रेल मंत्री भारत सरकार श्री लालू प्रसाद यादव ने यात्रा को प्रारम्भ किया। यात्रा का उद्देश्य बिहार में तीन केन्द्रीय विश्वविद्यालय और पांच एम्स स्तर के अस्पताल की मांग है। यह यात्रा बिहार के पश्चिम चम्पारण से गया तक पहुंची। यात्रा में मुख्य रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ0 रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रधान महासचिव श्री रामकृपाल यादव, पूर्व राज्यसभा सांसद श्री राजनीति प्रसाद सहित कई राजद नेता शामिल रहे। यात्रा के क्रम में राष्ट्रीय जनता दल द्वारा जहां-जहां जनसभा का आयोजन हुआ वहां लाखों की तादाद में बिहार की जनता इकट्‌ठा हुई।

बिहार को पांच विश्वविद्यालय देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बिहार सरकार श्री लालू प्रसाद यादव को सूनने और श्री यादव द्वारा अब केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मांग पर बिहार के लोग उनकी सभा में उनका समर्थन कर रहे थे। मालूम हो बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुये श्री यादव ने मधेपुरा में बी0एन0 मंडल विश्वविद्यालय की स्थापना, आरा में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना, पटना में नालन्दा खुला विश्वविद्यालय की स्थापना, छपरा में जयप्रकाश विश्वविद्यालय की स्थापना, पटना में मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। आधुनिक बिहार में शिक्षा व्यवस्था को समृद्ध करने का पूरा श्रेय श्री लालू प्रसाद यादव को जाता है।

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद यादव स्वंय भी शिक्षा प्रेमी रहे हैं। बिहार के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय पटना विश्वविद्यालय से ही राजनीति शास्त्र में परास्नातक (मास्टर ऑफ पॉलिटिकल साइंस) की शिक्षा श्री यादव ने प्राप्त की हुई है। यह श्री लालू प्रसाद यादव का ही प्रयास था कि बिहार के नालन्दा और गोपालगंज में सैनिक आवासीय विद्यालय की स्थापना हुई थी।

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के पक्ष में जबरदस्त लहर का दूसरा कारण है बिहार की जनता का नीतिश सरकार से मोहभंग होना। अब बिहार के लोग समझने लगे हैं कि नीतिश सरकार केवल विकास की बात ही करते रहते हैं जबकि श्री यादव विकास करते रहे किन्तु कभी ढोल नहीं पीटा। बिहार में गिरती कानून व्यवस्था से जनता में जबरदस्त आक्रोश है यह जनता का आक्रोश ही था कि बक्सर में नीतिश के काफीले पर बिहार की जनता ने पथराव कर दिया। बिहार के आरा में भी नीतिश को जनसभा करने जाना था किन्तु लोगों के जनाक्रोश को देखते हुये नीतिश आरा नही गये।

बिहार में कानून व्यवस्था गिरने का प्रमुख कारण है कि नीतिश सरकार के 116 विधायक दागी हैं। इनमें कई पर तो गम्भीर से गम्भीर आरोप लगे हुये हैं। नीतिश के विधायकों पर हत्या, अपहरण के आरोप लगना अब आम बात हो गई है। नीतिश राज में ही बिहार की राजधानी पटना पहली बार जल उठी। बिहार की जनता जमकर आगजनी, तोड़फोड़ करते रहे और नीतिश व बिहार पुलिस चुपचाप देखते ही रह गये। इस प्रकार की घटना बिहार के इतिहास में आज तक नहीं हुई थी।

लोकसभा चुनाव 2014 में भले ही लगभग 2 साल शेष हैं। बिहार राजनीति के जानकार अब भी कहते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2010 में टिकटों का बंटवारा जनता की पसंद के अनुसार किया गया होता तो परिणाम राजद के पक्ष में जाता। राजद समर्थक का आज भी आरोप है कि जनता की भावना को नजर अंदाज कर टिकटों का बंटवारा हुआ था। जिसके परिणाम सबके सामने है। चुनाव के वक्त राजद अध्यक्ष को वास्तविकता से दूर रखा गया। अब लोकसभा चुनाव 2014 में राजद को नये चेहरों को टिकट देना होगा। बिहार की जनता अब नयापन चाहती है समर्पित नये चेहरों को अब पहचान करना होगा जनता के बीच जाकर जनता की पसंद का भी आंकलन करना होगा। टिकट उन्हीं को दिया जाना चाहिए जिसे जनता चाहती हो जो जिताउ हो सके और पार्टी के प्रति भी समर्पित हो। उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने ऐसा ही किया था उसका परिणाम अब सबके सामने है।

पाटलीपुत्र लोकसभा क्षेत्र से राजद के भावी उम्मीदवार और बिहार प्रदेश महासचिव श्री एस0एन0 यादव उर्फ बबन यादव कहते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल अपनी उपलब्धि भी बिहार की जनता के सामने रखती रहेगी। विपक्ष अक्सर अफवाह फैलाता है कि पिछली सरकार ने काम नहीं किया जबकि सच यह है कि राजद सरकार ने बिना भेदभाव किये सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को साथ लेकर बिहार के विकास में कई अभूतपूर्व काम किये। राजद ने नीतिश की तरह ढोल पिटने का काम नहीं किया। राजद की जब सरकार बनेगी बिहार में फिर से अमन, चैन और बिहार में विकास होगा। मालूम हो पटना पश्चिम से अपने पहले ही विधानसभा चुनाव 2000 में राजद के उम्मीदवार के तौर पर श्री बबन यादव ने सर्वाधिक मत प्राप्त किया था। पटना पश्चिम से ही प्रधान महासचिव रामकृपाल यादव भी चुनाव लड़ चुके हैं। श्री रामकृपाल यादव से भी अधिक मत प्राप्त करने वाले श्री बबन यादव पटना राजद के काफी लोकप्रिय नेता हैं। वर्तमान में श्री रामकृपाल यादव राज्यसभा से सांसद चुन लिये गये हैं इसलिए पटना की जनता अब बबन यादव को पाटलीपुत्र लोकसभा से सांसद के रूप में देखना चाहती है। राजनीति के जानकार मानते हैं श्री बबन यादव पाटलीपुत्र लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान सांसद रंजन प्रसाद को चुनाव में मात दे सकते हैं।

बिहार में जो हालात हैं उसे देखते हुये राष्ट्रीय जनता दल को जनता की पसंद का उम्मीदवार शीघ्र तय कर लेना चाहिए। लोकसभा चुनाव 2014 में श्री लालू प्रसाद यादव पुन: किंग मेकर के रूप में उभरेंगे इस में किसी को संदेह नहीं है। बिहार में राजद की जबर्दस्त लहर है इस लहर को बनाये रखने के लिये राजद अध्यक्ष को जमीनी हकीकत से जुड़े रहना होगा। बिहार राजनीति के जानकार मानते हैं कि राजद अध्यक्ष तक विधानसभा क्षेत्र/लोकसभा क्षेत्र की हकीकत नहीं पहुंच पाती है। परिणाम सबके सामने है। राजद के आम कार्यकर्ता राजद अध्यक्ष से आज भी बहुत ज्यादा डरते हैं। इसी डर के कारण वो सच नहीं बोल पाते हैं। जबकि अपने कार्यकर्ता को बिना सम्मान दिये कोई भी पार्टी बेहतर स्थिति में नही पहुंच सकती।

इधर हाल में नीतिश ने अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री गुजरात सरकार नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिये अयोग्य बताया। भाजपा और जदयु में जमकर ड्रामारूपी तु-तु-मैं-मैं होने लगी। नीतिश द्वारा नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करना नीतिश की सोची समझी रणनीति थी। बिहार में गिरते कानून व्यवस्था भ्रष्ट्राचार, बिजली पानी की समस्या से लोगों का ध्यान हटाने के लिये नीतिश ने यह राजनीतिक चाल चली। यह अटल सत्य है नीतिश को अपना वजूद बचाये रखने के लिये भाजपा के साथ रहना ही पडेगा। नीतिश भाजपा का साथ नहीं छोडने वाले हैं। जिसकी पुष्टि जदयु के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शरद यादव ने भी कर दिया। सुत्रों के अनुसार जदयु के कुछ नेता चाहते हैं कि नीतिश यूपीए में शामिल हो जायें। इससे राजद को लोकसभा चुनाव 2014 में सम्भलने का मौका नहीं मिलेगा। नीतिश अगर यूपीए में शामिल होते हैं तो कांग्रेस राजद के बजाय जदयु से गठबंधन करना पसंद करेगा। जिससे राजद और कमजोर हो जायेगा। लेकिन नीतिश यूपीए में शामिल नहीं हो रहे हैं फिर भी राजनीति में सारे विकल्प खुले रहते हैं। कमजोर दल को केवल अपने समर्थक पर भरोसा करना चाहिए।

3 जुलाई 2012 को राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद समस्तीपुर से पद यात्रा प्रारम्भ की। समस्तीपुर समाजवादियों की भूमि रही है। समस्तीपुर में ही भाजपा के नेता लालकृण आडवाणी के रथ को रोककर लालू प्रसाद यादव रातों-रात राष्ट्रीय स्तर पर छा गये थे। पूर्व मुख्यमंत्री बिहार सरकार श्री कर्पूरी ठाकुर की जन्म स्थली समस्तीपुर ही है। श्री कर्पूरी ठाकुर के अति करीबी श्री लालू प्रसाद यादव रह चुके हैं। बिहार में राजद की लहर स्पष्ट झलकती है। जरूरत है राजद अध्यक्ष को जनता के बीच रहना। लोकसभा चुनाव 2014 में राजद को खोने के लिए कुछ भी नहीं है पाने के लिए बहुत कुछ है। याद रहे कि दूसरी पार्टियां जदयू और भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2010 में टिकटों का बंटवारा सर्वे के आधार पर किया था। भाजपा और जदयू ने उसी व्यक्ति को टिकट दिया जिसे क्षेत्रीय जनता पसंद करती थी। जमीनी हकीकत के साथ लेकर ही जदयू और भाजपा के अग्रीम पंक्तियों के नेताओं ने राजद और उसके गठबंधन को मात देने में सफल रहे थे।

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