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हर सुअवसर पर लालू जी ही क्यों आरोपित ?

 

आज देश के विपक्षी नेता या लालू जी के राजनीतिक दुश्मनों हमेशा ही उन्हें आरोपित किया, खासतौर से जब लालू जी को चुनावों में विजय प्राप्त होती है। जब सितम्बर 2009 में बिहार में हुए उपचुनाव का परिणाम आया तो इस पूर्व रेल मंत्री को वर्तमान रेलमंत्री ने यह कहकर लालू जी को दोषित किया कि इन्होंने (लालू जी) रेलवे भर्ती में घोटाला किया, रेलवे (इनके द्वारा दिखाए मुनाफे पर) श्वेत-पत्र  (18 दिसम्बर, 2009) जारी किया। अत: जब कभी भी लालू जी को खुशी होती है अच्छे कामों को करके तभी (तत्काल) उन्हें अन्य राजनैतिक दुश्मन बदनाम करने की कोशिश करते हैं लेकिन आज भारत की जनता भी समझ चुकी है कि लालू जी को जानबूझकर बदनाम किया जाता है। हम ये साबित कर सकते हैं कि लालू जी जिस मंत्रालय में भारत सरकार में शामिल होकर चार-चांद लगाया उसके बाद उन्हें कर्मठ, विकासशील जनहित नेता ही कहा जा सकता है।

इस तथ्य के लिए हमें निम्नलिखित बिन्दुओं पर अवश्य गौर फरमाना चाहिए—

  • आज देश-विदेश के कई विश्वविद्यालय एवं मैनेजमेंट संस्थान उन्हें ‘मैनेजमेंट गुरू’ कहके आमंत्रित किया—क्या हार्वड विश्वविद्यालय के प्राचार्य और छात्र नासमझ हैं जो लालू जी को आमंत्रित करके विकास का गुरू मंत्र लिया। सौ से अधिक संस्थाओं ने उनके बारे में जानकारी मांगी।

  • उन्होंने लगातार किराया घटाया, गरीब रथ चलाया, रेलवे को पिछले पाँच वर्षों में कुल 90 हजार करोड़ रूपए से अधिक का मुनाफा कराया, भारतीय रेलवे को मलेशिया के प्रोजेक्ट हेतु एक बिलियन डॉलर का काम मिला, रेलवे की नौकरियों के लिए मुस्लिम सम्प्रदाय के लोगों का सम्मान करते हुए मदरसों की डिग्री स्वीकार करने का फैसला किया, रेलवे कर्मचारियों के बेटों को नौकरी देने पर विचार, वृद्ध महिलाओं को सभी श्रेणियों की टिकटों में छूट, कुलियों को गैंगमैन के रूप में नियुक्ति, रेलवे में उर्दू को बढ़ावा, छात्र/छात्राओं को मुफ्त मासिक सीजन टिकट, रेलवे में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ बनाने की घोषणा, सुरक्षा हेतु 5700 सिपाहियों की भर्ती आदि।

  • विदेशों से रेल के नई तकनीक लाकर भारत में रेलवे के विकास करने वाले लालू जी प्रथम रेल मंत्री है।

ममता जी द्वारा लालू जी की लोकप्रियता को कम करने की कोशिश
लोकसभा में श्वेत-पत्र जारी (18 दिसम्बर, 2009)


राजद अध्यक्ष और पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद जी के दौर (2004-09) में रेलवे की कायापलट इसकी आमद और आर्थिक सेहत में उछाल संबंधी प्रचार को रेल मंत्रालय (ममता बनर्जी) ने हवाई और आकड़े की बाजीगरी बताया है। रेलमंत्री ममता बनर्जी ने 18 दिसम्बर, 2009 को लोकसभा में रेलवे पर एक श्वेत-पत्र जारी किया।

सवाल यह है कि क्या श्वेत-पत्र की सचमुच कोई जरूरत थी ? या ममता दीदी द्वारा लालू जी की लोकप्रियता को कम करने की कोशिश भर है।
प्रधानमंत्री जी भी लालू जी की तारीफ करते ही रहे थे। एक ही सरकार के दो कार्यकाल में दो विभिन्न मंत्रियों का एक-दूसरे के प्रति यह रवैया हास्यास्पद ही नहीं, चिंताजनक भी है।

दीदी जब से रेलमंत्री बनी हैं तब से रेल दुर्घटनाएं अपने चरम पर है। वर्ष 2009 में दुर्घटनाएं की सारे रिकार्ड टूट गये। चाहे राजधानी एक्सप्रेस का अगवा होना, मथुरा रेल दुर्घटना, मंडोर एक्सप्रेस दुर्घटना आदि। इनके रेल में सुरक्षा की दृष्टि को उजागर करने हेतु काफी है। ऐसा तो रेल मंत्री लालू जी के समय में नहीं था, उस समय रेल दुर्घटनाएं नहीं के बराबर थी, रेलवे में सुरक्षा, सुविधा एवं साफ-सफाई भी थी।

दीदी जी आप वर्तमान में काफी बेखबर रहती हैं जिससे आये दिन रेल-दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लगता है आपका सिर्फ एक बिन्दु कार्यक्रम है-लालू जी को बदनाम करना। ममता दीदी का ध्यान पश्चिम बंगाल की राजनीति पर है, वह तो मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं-पश्चिम बंगाल की। दीदी को मंहगाई, रेलवे में सुरक्षा-सुविधा नजर नहीं आ रही है। दीदी रहती हैं साधारण वेश-भूषा में, गरीबों के बारें में सिर्फ सोचती हैं ? दीदी यहां की जनता ताज देती है तो ताज छीन भी लेती है। पब्लिक सब समझती है ? क्योंकि कथनी-करनी में कोई तालमेल नहीं है आप में।
दीदी (ममता जी) भले ही आप लालू जी पर अनेक किस्म के आरोप लगाते रहें, इस बात से कैसे इंकार किया जा सकता है कि उन्होंने केन्द्रीय सहायता पर किसी तरह चलती रेलवे कायाकल्प करके दिखाया है।
दीदी आप मानो या ना मानों सच तो यही है कि लालू जी रेलवे के मैनेजमेंट गुरू हैं और रहेंगे।

जब लालू जी पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री 1990-95 अवधि के लिए बने तो उनके इस शासनकाल के प्रारम्भिक अवधि में काफी सुधारात्मक कार्य होने लगे जिसके कारण उनकी ख्याति और बढ़ने लगी। इसकी बढ़ती ख्याति एवं प्रसिद्धि से तत्कालीन विरोधी राजनेताओं के गले नहीं उतर रही थी। फलस्वरूप विरोधियों ने भी लालू जी (तत्कालीन मुख्यमंत्री) पर चारा घोटाला जैसे मुद्दा उठाया उन्हें बदनाम करने की कोशिश की, जबकि हकीकत में स्वयं लालू जी ने इस घोटाले को उजागर किया। 1990 के दशक में विश्व बैंक ने भी श्री लालू प्रसाद की सरकार की आर्थिक मोर्चों पर सफलता के लिए प्रशंसा की थी।

 

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